हिन्दू क्या है, सनातन क्या है और धर्म क्या है ?

हिन्दू  एक हजार वर्ष पूर्व हिंदू शब्द का प्रचलन नहीं था। ऋग्वेद में कई बार सप्त सिंधु का उल्लेख मिलता है। सिंधु शब्द का अर्थ नदी या जलराशि होता है इसी आधार पर एक नदी[…]

कैवल्यपाद

कैवल्यपाद (पातञ्जलयोगप्रदीप – योगदर्शन) जन्म, ओषधि, मन्त्र, तप और समाधि से उत्पन्न होने वाली सिद्धियां हैं ||१|| एक जाती से दूसरी जाती में बदल जाना प्रकृतियों के भरने से होता है ||२|| धर्मादि निमित्त प्रकृतियों[…]

विभूतिपाद

विभूतिपाद (पातञ्जलयोगप्रदीप – योगदर्शन) चित्त का वृत्ति मात्र से किसी स्थान विशेष में बाँधना ‘धारणा’ कहलाता है ||१|| उसमें वृत्ति का एक-सा बना रहना ‘ध्यान’ है ||२|| वह ध्यान ही ‘समाधि’ कहलाता है, जब उसमें[…]

साधनपाद

साधनपाद (पातञ्जलयोगप्रदीप – योगदर्शन) तप , स्वाध्याय एवं ईश्वरप्रणिधान क्रिया योग है । यह समाधिभाव देता है एवं क्लेश को कमजोर बना देता है । अविद्या , अस्मिता , राग , द्वेष एवं अभिनिवेश – ये[…]

समाधिपाद

समाधिपाद (पातञ्जलयोगप्रदीप – योगदर्शन) अब योगानुशासन का प्रारम्भ करते हैं ॥ १ ॥ योग चित्त की वृत्ति का निरोध है ॥ २ ॥ उस समय द्रष्टा अपने रुप में स्थिर हो जाता है ॥ ३[…]

योग के भेद (प्रकार)

चित्त की वृत्तियों का रोकना योग है | साधकों के भेद से योग को निम्न श्रेणियों में विभक्त किया गया है – १. राज योग अर्थात ध्यान योग – पतंजलि योग दर्शन का मुख्य विषय[…]

योग दर्शन

योग दर्शन – योग दर्शन के आदि आचार्य हिरण्यगर्भ है | हिरण्यगर्भ – सूत्रों के आधार पर ( जो इस समय लुप्त है ) पतञ्जलि मुनि ने योग दर्शन का निर्माण किया | योगदर्शन के[…]

योग ( ज्ञान योग , उपासना योग और कर्मयोग ) का वास्तविक स्वरुप –

योग सांख्य का ही क्रियात्मक रूप है | योग सारे सम्प्रदायों और मत – मतान्तरों के पक्षपात और वाद- विवाद से रहित सार्वभौम धर्म है, जो तत्त्व का ज्ञान स्वयं अनुभव द्वारा प्राप्त करना सिखलाता[…]

सांख्यदर्शन

तत्त्वसमास सांख्यदर्शन – दुखों कि निवृत्ति का साधन तत्त्वों का यथार्थ ज्ञान हैं | दुःख कि जड़ ज्ञान हैं | जितना अधिक ज्ञान होगा उतना ही अधिक दुःख होगा | जितना काम ज्ञान होगा उतना[…]

सांख्य दर्शन के मुख्य ग्रन्थ

सांख्य दर्शन के मुख्य ग्रन्थ – सांख्य के बहुत से प्राचीन ग्रन्थ ई समय लिप्त हैं | कई एक के केवल नाम ही मिलते है | १. कपिल मुनि प्रणीत ‘तत्त्वसमास’ – इसके वर्तमान समय[…]

सांख्य और योग दर्शन

सांख्य और योग दर्शन – परमात्मा ( चेतनतत्त्व) के निर्गुण शुद्ध स्वरुप का वर्णन उपनिषदों में विस्तारपूर्वक किया गया है, इसलिए उपनिषदों को वेदांत कहते है – ज्ञान का अन्त अर्थात जिसके जानने के बाद[…]

न्याय और वैशेषिक दर्शन का सिद्धांत

न्याय और वैशेषिक का सिद्धांत –  कार्य कारण किसी प्रयोजन के लिए बनी हुई वस्तु कार्य कहलाता है, जैसे वस्त्र |   बिना कारण के कोई कार्य नहीं हो सकता |   यह कारण तीन[…]

न्याय – दर्शन

न्याय – दर्शन – न्याय सूत्र के रचयिता का गोतम ( गोत्र नाम गोतम ) है और व्यक्तिगत नाम अक्षपाद है | विभिन्न प्रमाणों की सहायता से वस्तुतत्त्व की परीक्षा न्याय हैं | न्यायसूत्र पांच[…]

वैशेषिक दर्शन

वैशेषिक दर्शन – इस दर्शन का नाम कणाद और औलूक्य भी है | वैशेषिक का अर्थ है पदार्थों में भेदों का बोधक , और पदार्थ उसे कहते हैं जो प्रतीति से सिद्ध हो | विशेष[…]

उत्तरमीमांसा – (वेदांत दर्शन)

वेदांत दर्शन ( उत्तरमीमांसा )     उत्तरमीमांसा को ब्रह्मसूत्र , शारीरिक सूत्र , ब्रह्म मीमांसा तथा वेद का अंतिम तात्पर्य बतलाने से वेदान्तदर्शन और वेदांत मीमांसा भी कहते हैं |     वेदांत दर्शन[…]

पूर्व मीमांसा ( मीमांसा दर्शन )

  पूर्वमीमांसा श्री वेदव्यास जी के शिष्य जैमिनी मुनि ने प्रवृति मार्गी गृहस्थियों तथा कर्मकाण्डियों के लिए बनायी हैं | इसको जैमिनी दर्शन भी कहते हैं |     (पूर्व) मीमांसा के अनुसार धर्म की[…]

पूर्व मीमांसा और उत्तर मीमांसा अर्थात मीमांसा और वेदांत दर्शन

कर्मकाण्ड – वेदशास्त्रों में बतलायी हुई – कर्त्तव्य कर्मों अर्थात इष्ट और पूर्त्त कर्मों की – शिक्षा का नाम कर्मकाण्ड है |   इष्ट वे कर्म हैं, जिनकी विधि , मन्त्रों में दी गयी हो[…]

दर्शन: क्या हैं ?

दर्शन: – वेदों में बतलाये हुए ज्ञान की मीमांसा दर्शनशास्त्रों में मुनियों द्वारा सूत्र रूप में की गयी हैं |   दर्शन शब्द का अर्थ हैं ‘जिसके द्वारा देखा जाय’ अर्थात वस्तु का तात्त्विक स्वरुप[…]

वेद क्या हैं ?

वेद ईश्वरीय ज्ञान है, जिसका प्रादुर्भाव ऋषियों पर सृष्टि के आरम्भ में समाधी द्वारा होता है | १. मूल वेदमंत्र – इन मन्त्रों की चार संहिताएँ है, जो – ऋग्वेद , यजुर्वेद , सामवेद और[…]

योग क्या है ?

योग क्या है ?   योग एक दैवी वैधानिक शक्ति है।   जीवन के प्रत्येक पहलू में योग अपेक्षित है।   शरीर-विज्ञान, मनोविज्ञान, आध्यात्म-विज्ञान एवं आस्तिक-विज्ञान योग में निहित हैं।   देहाभिमानी साधकों के लिए[…]

लोग निंदा करें तो करने दो

लोग निंदा करें तो करने दो | सब लोगों को अपनी तरफ से छुट्टी दे दो , वे चाहे निंदा करें , चाहे प्रसंशा करें, जिसमे वे राजी हों, करें | आप सबको छुट्टी दे[…]

सार्वभौम सत्य … सर्वमान्य सत्य …

सत्य अनन्त है , पुस्तक आदि में सीमित नहीं हो सकता ,  सत्य अपना परिचय देने में स्वयं स्वतन्त्र है  “सर्वमान्य सत्य” को देश, काल, मत, वर्ग, संप्रदाय, मजहब का भेद छू नहीं सकता है। यह विचार है, उस सन्त के जो पुस्तक[…]

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Meaning of Gayatri Mantra : गायत्री मंत्र का अर्थ

गायत्री मंत्र  ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् (ॐ/ओं) यह प्रभु का मुख्य नाम है | वह (भू:) प्राणों का प्राण (भुवः) दुःखनाशक (स्वः) सुखस्वरूप है | (तत्) उस (सवितुः)[…]

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मानवता के मूल सिद्धान्त

मानवता के मूल सिद्धान्त 1. आत्म-निरीक्षण, अर्थात्‌ प्राप्त विवेक के प्रकाश में अपने दोषों को देखना । 2. की हुई भूल को पुन: न दोहराने का व्रत लेकर, सरल विश्वासपूर्वक प्रार्थना करना । 3. विचार[…]

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जो हम चाहते हैं, वह न हो !

मेरा अपना अबतक का अनुभव है कि जो हम चाहते हैं, वह न हो, इसी में हमारा हित है। हमने तो जब तक अपने मन की मानी है, तब तक सिवाय पतन के, सिवाय अवनति[…]

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गुरु कौन है ? चेला कौन है ?

आपका गुरु कौन है ? वे बोले  कि जो मेरेसे ज्यादा जानता है , वह मेरा गुरु है | फिर पूछा कि आप का चेला कौन है ? आपका गुरु कौन है  वे बोले कि जो मेरेसे कम[…]

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मानव-जीवन की पूर्णता ?

दिल्ली में श्री कृष्णमूर्ति जी जहाँ ठहरे थे वहाँ श्री स्वामीजी महाराज पहुँचे । श्री कृष्णमूर्ति जी ने अत्यन्त आदर और स्नेह के साथ स्वामीजी का स्वागत किया तथा अपनी विशेष कुर्सी पर ही स्वामीजी[…]

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सत्य

सत्य अनन्त है , पुस्तक आदि में सीमित नहीं हो सकता ,  सत्य अपना परिचय देने में स्वयं स्वतन्त्र है  “सर्वमान्य सत्य” को देश, काल, मत, वर्ग, संप्रदाय, मजहब का भेद छू नहीं सकता है। यह विचार है, उस सन्त के जो पुस्तक[…]

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धर्म के पाँच आधार

    तुम्हारे हृदय की करुणा ने ये निर्णय करवाया है । और करुणा तो धर्म का आधार है । मैनें तुम्हे जो पाँच पत्थर दिये थे द्रौपदी वो धर्म का उप्देश था, धर्म का[…]

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मनुष्य असमपुर्ण है, मनुष्य मनुष्य की परीक्षा के योग्य नहीं !

Meera (Hindi: मीरा) is a 1979 Hindi language film by Gulzar Directed by Gulzar Produced by Premji, J.N. Manchanda Written by Gulzar Screenplay by Gulzar   manushya asampurna hai ,  manushya, manushya ki pariksha ke yogya nahin   mrityu se mujhe[…]

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हमने तुम्हे ताकत दी, तुमने जुल्म किया, हमने इसे ताकत दी, इसने इन्साफ किया !

Film : Saudagar (Hindi:सौदागर) is a (1991) Bollywood film, directed by Subhash Ghai   हमने तुम्हे ताकत दी, तुमने जुल्म किया, हमने इसे ताकत दी, इसने इन्साफ किया ! humne tumhe taakat di, tumne julm kiya, humne[…]

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सात सुख : The seven bliss !

पहला सुख – निरोगी काया, दूजा सुख – घर में हो माया, तीजा सुख – सुलक्षणा नारी, चौथा सुख – हो पुत्र आज्ञाकारी, पाँचवां सुख – हो सुन्दर वास, छठा सुख – हो अच्छा पास, साँतवां सुख – हो मित्र घनेरे, और नहीं जगत में दुखः बहुतेरे !   

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आराम करो : Take Rest !

आराम करो एक मित्र मिले, बोले, “लाला, तुम किस चक्की का खाते हो? इस डेढ़ छँटाक के राशन में भी तोंद बढ़ाए जाते हो। क्या रक्खा है माँस बढ़ाने में, मनहूस, अक्ल से काम करो।[…]

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मानवता के मूल सिद्धान्त

मानवता के मूल सिद्धान्त 1. आत्म-निरीक्षण, अर्थात्‌ प्राप्त विवेक के प्रकाश में अपने दोषों को देखना । 2. की हुई भूल को पुन: न दोहराने का व्रत लेकर, सरल विश्वासपूर्वक प्रार्थना करना । 3. विचार[…]

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छ: दर्शनोंसे निराला दर्शन

वे  महात्मा, क्या थे  महाराज ! मेरे मनसे अगर आप पूछो तो नये दार्शनिक थे!  जैसे योग है, सांख्य है, पूर्व मीमांसा है, उत्तर मीमांसा है, न्याय है, छ: दर्शन है। छ: दर्शनोंसे निराला दर्शन[…]

श्रीमद्भगवद्गीता ( गीता ) यथार्त रूप हिंदी मैं ! PPT

श्रीमद्भगवद्गीता – अर्जुनविषादयोग , आत्मसंयमयोग और ज्ञानविज्ञानयोग नामक १ ला, २ रा और ३ रा अध्याय Geeta – hindi translation in PPT ( Power Point presentation format) .Chapter 1 to 3 .   श्रीमद्भगवद्गीता –[…]